THE ORIGIN AND EVOLUTION OF GALAXIES

Galaxies की Origin और  Evolution

आसमान के इस दिलकश और रहस्यमय नज़ारे ने   सदा ही हमे सोचने पर मजबूर किया है (see Below Image )।किसी जमाने मे   जब हम रात को आसमान में देखते थे   तो हमें   यह अनगिनत तारे और एक दूधिया पट्टी जिसे Milky way  या आकाशगंगा कहते  हैं नजर आता था। 
आज light pollution के कारण   यह हमे नजर नही आता। आज हम इसे   केवल धरती के कुछ   सुदूर जगहों से ही देख सकते है। जहा artificial lighting नही होती है। इस नज़ारे ने सदा ही   मानव को अचरज में डाला है। अलग-अलग काल में   अलग-अलग लोगों ने   अपने अपने समय की समझ  के अनुसार   इस दूधिया पट्टी को समझाने का प्रयास किया है।   मसलन पाँचवीं सदी ईसा पूर्व में Democrates ने सुझाया कि शायद milky way कई सारे तारों से मिलकर बना हुआ है। Aristotle के अनुसार  Milky Way आसमान के ऊपरी हिस्से में स्थित है।  जहां पर बाकी के आकाशिय खंड मौजूद हैं।   उनके अनुसार यह Milky Way असल में बहुत सारे बड़े-बड़े तारे जो एक दूसरे के काफी करीब हैं,   उनके ज्वलनशील स्वास्थ छोड़ने की वजह से  हमें नजर  आता हैं।
अगर आप ब्रह्मांड में देखें   तो जो भी चीजें आपको नजर आएँगी   वह ज़्यादातर galaxies मे हीं मौजूद हैं।   आप जो भी celestial bodies देखते है चाहे तारे, ग्रह या फिर कोई अन्य खंड यह सभी galaxies में  ही स्थित है।
Galaxies   dust, gas, dark matter और कुछ लाख से लेकर कई अरब तारों के विशाल system है । जो   gravity के कारण एक दूसरे से बंधे हुए है। यह माना जाता है   की लगभग सभी बड़ी galaxies के केंद्र मे  एक supermassive black hole होता है। हमारी अपनी galaxy   milky way के अंदर 100-400 अरब तारे है। इन्ही में से  एक हमारा सूर्य है। यह सभी Sagittarius A* का चक्कर लगाते है। जो हमारी galaxy के केंद्र मे स्थित एक supermassive black hole है। इसका mass लगभग 40 लाख सूर्यो के बराबर है।  
ब्रह्मांड मे   हम जितना गहरा देखते है, हमे और ज्यादा galaxies नज़र आती है। एक अनुमान के अनुसार   हमे नज़र आने वाले ब्रह्मांड मे   2000 अरब जितनी galaxies मौजूद हो सकती है । इनमें से कुछ   हमारी Milky way जैसी है और कुछ इससे बिलकुल अलग ।
Galaxies कैसे बनी यह समझने के लिए हमें पहले यह समझना पड़ेगा कि ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई ? क्योंकि इसका रहस्य कि, आखिर galaxies क्यों और कैसे बनी? यह ब्रह्मांड की शुरुआत से ही जुड़ा हुआ है।
जैसा कि आप जानते हैं। कि आज से 14 Arab वर्ष पहले एक धमाका हुआ था । जिसे Big-Bang कहते हैं। इसी धमाके से ब्रह्मांड की सुरुवात हुई।   इस धमाके में बहुत सारी उर्जा उत्पन्न हुई।   Big bang से उत्पन्न ज्यादातर ऊर्जा हमे dark energy के रूप में दिखाई देती है, जो ब्रह्मांड को expand कर रही है। जैसे-जैसे   हमारा  ब्रह्मांड और बड़ा और ठंडा होता गया   dark energy के अतिरिक्त बाकी की ऊर्जा कणों के रूप में   संघनित या Condense होने लगी।   यह कण कई प्रकार के थे   इनमें से कुछ ऐसे थे जिनसे हम और आप बने हैं यानी कि सामान्य matter. और   बाकी ऐसे थे  जिनसे बाकी की चीजें बानी।   जो इस ब्रह्मांड में मौजूद है   या जिनके होने की संभावना है। जैसे dark matter. 
Big-bang के लगभग 3,00,0000 साल बाद   hydrogen और helium के पहले atoms का  बनना शुरू हुआ।   इस समय के लगभग सभी hydrogen Atoms neutral थे।   जिसकी वजह से   वे Photons  को absorb कर लेते थे।   Photons के  न होने की वजह से ब्रह्माण्ड में चारों ओर अंधेरा था। इसलिए इस समय को cosmic dark ages भी कहा जाता है ।
ब्रह्माण्ड में   hydrogen के यह atoms किसी महासागर की तरह चारों ओर सामान रूप से फैले हुए थे।   Density fluctuations के कारण   इस महासागर मे   कई जगहों पर high density regions या lumps बनने लगे,   इन lumps के formation में केवल सामान्य matter का गुरुत्वाकर्षण काफी नहीं था। इसमें dark matter के गुरुत्वाकर्षण ने भी बहुत अहम किरदार अदा किया। भले ही dark matter   हमसे यानि सामान्य matter से  किसी भी और प्रकार से interact नही करता है। मगर इसकी भी gravity होती है।   तो हम कह सकते हैं   कि यह lumps   केवल ordinary matter से नहीं   बल्कि   dark matter और ordinary matter दोनों से मिलकर बने थे।   इन lumps की वजह से ब्रह्माण्ड में विशाल structures दिखाई देने लगते है ।   Lumps के इन प्राचीन structures से ही   बाद मे galaxies बनती है ।  
उन प्रक्रियाओं को   जिनसे सुरुवाती galaxies बनी   अभी तक सही से   समझा नही जा सका है । Galaxies के formation को समझाने वाली कई theories है,   इन Theories को दो categories मे बाँटा जा सकता है,   top-down और bottom-up Theories.  

1. Top-down theories का यह कहना है   की पहले galaxies के आकार के बड़े structures बने   और बाद में इन structures में   लोकल Collapses के कारण   इनमें   बाकी की चीजें बानी ।

2. Bottom-up theories का यह कहना  है,   की शुरुआती ब्रह्माण्ड के Lumps   Galaxies  आकर के नहीं थे  बल्कि इससे काफ़ी छोटे थे।   जिनसे  पहले  कुछ लाख तारों वाले   ऐसे   छोटे-छोटे clusters बने   जिन्हे  globular cluster कहते है। और   बाद में इन Clusters के एक दूसरे में  मिलने से   galaxies बनी।   
खैर चाहे जो भी हुआ हो आगे बढ़ते है। 
इन Lumps के  उनके अंदर contraction से   पहले तारे बने । जब तक   यह पहले तारे बने   ब्रह्मांड 40 crore साल का   हो चुका था।   यह शुरूआती तारे   लगभग पूरे के पूरे   hydrogen और helium से बने हुए थे।    क्यूकी इन Lumps में   gases की कोई कमी नहीं थी   इसलिए ये तारे   बहुत massive थे।   और जैसा की आप सब जानते हैं   कि भारी तारे   काफी जल्दी   मर जाते हैं।   यह तारे भी   अपने fuel को   जल्दी consume कर के   ब्रह्माण्ड में चारों ओर   heavy elements बिखेतरे हुए    supernovae के रूप में    समाप्त हो गए होंगे।   यह hydrogen से भारी   वो तत्व थे,   जिनसे बाद मे   धरती जैसे पथरीले गृह बने   और   जो जीवन के निर्माण के लिए आवश्यक थे।
जैसा की आप सब जानते हैं   कि बेहद भारी तारे   मरने पर   black hole में तब्दील हो जाते हैं।   इन शुरूआती तारों के मरने से   बहुत सारे black hole बने।   यह black-holes   बाद में   एक दूसरे में मिलकर   बहुत बड़े Black Hole का रूप लेने लगे।   यह वही supermassive black-holes है   जो आज   Globular Clusters   और   ज्यादातर   galaxies के    केंद्र मे पाए जाते है ।
हलाकि   यह theory भी   debated है। क्योंकि   नई findings में   कुछ   ऐसी galaxies मिली है   जो   इतनी ज्यादा पुरानी है   की वे big-bang से   सिर्फ कुछ अरब वर्ष   बाद ही बनी थी।    इनमें भी quasar नज़र आ रहे  थे । जो यह दर्शाता है   की इनके केंद्र में   उस समय भी   एक supermassive black hole मौजूद था।   पर   यह संभव नहीं हो सकता   की यह black-hole   कोई stellar black-hole हो   यानि की   तारे के मरने से बने  black-hole हो   क्योंकि   इतने कम समय अंदर   इतने सरे तारे   नहीं मर सकते   की वे   इतने बड़े black-hole का   निर्माण कर सके।   क्यूकी   ब्रह्माण्ड के पहले तारे   big bang से कुछ   40 करोड़ वर्ष बाद ही   बनने   शुरू हुए थे ।   इसके अलावा भी   ऐसी बहुत सी observations है।    जिन्हे यह hypothesis   समझा नही पाती। 
कुछ लोगो का यह मानना है   की शुरुआती   supermassive black-hole   तारों के मरने से   नहीं बने थे    बल्कि यह   शुरुआती ब्रह्माण्ड में मौजूद   हालातों की वजह से बने   primordial black-holes है।   जो   gravitational fluctuations   के कारण   बने होंगे।   पर   इन  supermassive black-holes के   formation की यह theory भी   debated है।   इनके formation को समझाने वाली   और भी theories है।    पर कोई भी   universally accepted नहीं है।   खैर   हमारे लिए   अभी यह जानना काफी है   की यह supermassive black-holes   जो Globular Clusters   और   galaxies के केंद्र में पाए जाते है   उस समय भी मौजूद थे   और   galaxies के evolution में   इनका भी एक   महत्पूर्ण हाथ है।  
  
बाद मे बने तारे    शुरूआती तारों से   छोटे थे   और   इनके बनने के बाद   इनके इर्द-गिर्द बचे   गैस और धूल के कणों से   बाकी की चीजें   जैसे   ग्रह, उनके चाँद और अन्य खंड बने।   अभी भी   galaxies के निर्माण के   कई  प्रश्नों के  उत्तर   बाकी है। 
ब्रह्माण्ड की शुरूआती galaxies   आज की  galaxies   की तुलना में   काफी छोटी थी।   पर धीरे-धीरे   यह छोटी-छोटी galaxies   आपस में टकराने लगी   और   और भी बाड़ी   galaxies  का रूप लेने लगी। और धीरे-धीरे   हमें ब्रह्मांड   वैसा नजर आने लगता है।  जिस रूप में   आज हम इसे देखते हैं।   हमारी   milky way भी   ऐसी   कई सारी galaxies   के Merger से बनी होगी। आज भी galaxies का   एक दूसरे से टकराना   रुका नहीं है।   आज भी galaxies   एक दूसरे से टकरा रही हैं।   और   और भी बड़ी galaxies का   निर्माण कर रही हैं।   आज से कुछ 5 Arab वर्ष बाद   हमारी galaxy Milky way   और   Andromeda galaxy भी   आपस में टकराएंगी   जिससे वे   और भी बड़े   galaxy का निर्माण करेगी। 
क्यूकी   elliptical galaxies मे   ज़्यादातर वृद्ध तारे होते है   और इनमें   spiral galaxies से   कम gas होता है । ऐसा लगता है   की galaxies के विभिन्न प्रकार   असल मे किसी galaxy के जीवन के   अलग-अलग पड़ावों को दर्शाते है।   जैसे-जैसे   spiral galaxies   उम्र मे   बढ़ती जाती है   दूसरे galaxies से interact और merge होती है ।   वे   अपने जाने पहचाने आकार को   खो देती है ।   और   elliptical galaxies बन जाती है।   पर अभी भी   galaxies के evolution को   ठीक से  समझा ही जा रहा है। शायद   भविष्य मे galaxies के जीवन चक्र को   और बेहतर   समझा जा सकेगा । 

चलिए   अब हम समझते हैं   की   क्या किसी galaxy  का भी   कभी अंत हो सकता है ?




ब्रह्मांड में   हर किसी चीज का   अंत होता है। जो चीज बनी है   उसे मिटाना ही है   और galaxies तो क्या   स्वयं ब्रह्माण्ड भी   इससे परे नहीं,   आज हम   जिन galaxies को देख रहे हैं    यह सदा   ऐसी नहीं रहेंगी। धीरे-धीरे   इन galaxies के अंदर मौजूद gas   खत्म हो जाएगा। और   इनमें नए तारों का बनना   बंद हो जाएगा। आज भी ऐसी बहुत सी galaxies हैं   जिनके अंदर   नए तारों का बनना   बंद हो चुका है। और   धीरे-धीरे,   जैसे-जैसे,   ब्रह्मांड की उम्र   बढ़ती जाएगी   पुराने तारे भी   नष्ट होते जाएंगे। और फिर   धीरे-धीरे   ब्रह्मांड में   जो भी चीजें मौजूद हैं   वह सभी भी   खत्म होती जाएंगी। ब्रह्मांड के फैलने के कारण   धीरे-धीरे सब चीजें   एक दूसरे से   दूर होती जाएंगी और   एक समय ऐसा आएगा   जब   तारों के बीच का आपसी ग्रूत्व भी   ब्रह्माण्ड के फैलाव के सामने   कमजोर पड जाएगा   और तारे भी   एक दूसरे से   दूर हो जाएंगे   और   फिर इस ब्रह्मांड में   galaxies नहीं होंगी। धीरे-धीरे   यह तारे भी   खत्म हो जाएंगे और फिर   एक वक्त ऐसा आएगा   जब तारों के न होने के कारण   ब्रह्माण्ड मे अंधेरा छा जाएगा।   ग्रह   और बाकी की चीज़े   कुछ और वक्त तक   इन तारों के अवसेशों   जैसे   white dwarf, neutron stars और black-holes का   चक्कर लगाती रहेंगी। धीरे-धीरे   यह सबकुछ भी   खत्म हो जाएगा ।  black holes भी   evaporate हो जाएंगे   और ब्रह्मांड मे   सब कुछ खत्म हो जाएगा।   एक वक्त के बाद   ब्रह्माण्ड के फैलाव के कारण    कण भी नष्ट हो जाएंगे   और ब्रह्मांड मे   कुछ भी नही बचेगा।   पर   डरने की जरूरत नही है।   अभी ब्रह्माण्ड   कई अरब वर्षो तक   हमे जैसा दिखाई दे रहा है   वैसा ही बना रहेगा।  

अब   चलिए हम समझते हैं   कि आखिर   हमें यह सब   मालूम कैसे पड़ता है,   कि गैलेक्सिस कैसे बनी ?    यह किस प्रकार से evolve होती हैं ? 



आखिर आप   galactic scale पर   देखे तो   चीजें   बहुत ही धीमी गति से होती है।   galactic scale पर   कोई घटना घटने में   अरबों वर्ष लग जाते हैं।   और   मानव का जीवन   इतना बड़ा   नहीं होता है   कि वे उन्हें   अपनी आंखों से देख सके।   पर यदि आप   ब्रह्मांड में देखे तो   यहा पर   बहुत सारी galaxies मौजूद है। और   वे हमसे अरबों प्रकाश-वर्ष दूर है। क्योंकि   प्रकाश को वहा से   हम तक आने में   एक सीमित समय लगता है।  इसलिए   हम इन Galaxies को   उस रूप में देख सकते हैं   जिस रूप में ये   उस समय थी   जिस समय इनसे   प्रकाश निकलना   शुरू हुआ था ।   हम अंतरिक्ष में  जितना दूर देखते हैं   हम वक्त में   उतना ही पीछे   देख रहे होते हैं।   और   बेहतरीन telescopes की सहायता से   अंतरिक्ष में   और गहराई तक देखा जा सकता है।    यानी   हम अंतरिक्ष को   उसके और युवा रूप में देख सकते हैं।   यानी कि उस समय   जब big-bang के   कुछ करोड़ वर्ष ही   बीते थे। और   हम जान सकते है   की तब ब्रह्मांड   कैसा था। और   ऐसी बहुत सारी galaxies को देख करके   और उनमें   similarities को समझ कर के   हम यह समझ सकते हैं   कि आखिर galaxies   किस तरीके से   evolve होती है । 
धन्यवाद । 
Attributions – 

Images: NASA, Wikipedia.org, Pixabay.com
Sources: NASA, Wikipedia.org, noao.edu


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