What is a Planet?

What is a Planet?


planet
सभी को पता है की धरती, (PAUSE) मंगल और Venus की ही तरह एक ग्रह है। अभी तक की जानकारी के हिसाब से हमारे सौरमण्डल मे कुल 8 ग्रह है। पर आखिर ग्रह की वास्तविक परिभाषा क्या है? आखिर वो कौन से  गुण-धर्म है जो अंतरिक्ष मे तैर रही किसी वस्तु को ग्रह बनाते  है? या दूसरे शब्दों मे कहे तो Planet क्या है? इसकी definition क्या है?  
              Planet शब्द, Greek भाषा के शब्द planētēs से लिया गया है, जिसका अर्थ है wanderer या भटकने वाला । शुरुआत मे इस शब्द का उपयोग चमकने वाली उन चीज़ो के लिए होता था जो रात के आसमान मे चलती हुई  नज़र आती थी। जैसे जैसे ब्रह्माण्ड के प्रति हमारी समझ मे इज़ाफा हुआ इस शब्द को और बेहतर परिभाषित करने की आवश्यकता पड़ी। इस  बहुत ही साधारण से  नज़र आने वाले  प्रश्न का कोई  आसान सा उत्तर नही है । 
              Pluto और Ceres भी एक जमाने मे planets माने जाते थे, पर नई discoveries के बाद यह debate शुरू हुआ की इन्हे और इनके जैसे दूसरे objects को किस तरह describe करे, जो debate आज तक चल रहा है। जैसे जैसे हमारी ब्रह्माण्ड की समझ और बढ़ेगी यह discussion और debate आगे भी चलता रहेगा। 
              Planet शब्द को परिभाषित करना बहुत आवश्यक है, क्यूकी इन परिभाषाओ से ही हमें सौरमण्डल अर्थात हमारे solar system के जन्म, बनावट और विकास की झलक मिलती है। 
              वक्त के साथ हम जिन चीजों को planets कहते है इसमे काफी बदलाव आया है। प्राचीन काल मे Mercury, Venus, Mars, Jupiter, और Saturn के साथ-साथ चाँद और सूर्य को भी गृह माना जाता था, पर धरती को planet नही गिना जाता था। धरती को एक ऐसा केन्द्रीय object माना जाता था जिसका चक्कर ब्रह्माण्ड की सभी आकाशीय पिंड या celestial bodies लगाती थी। तीसरी सदी ईसा पूर्व मे Greece के Samos मे रहने वाले Aristarchus (pronounced as: Aris-tar-cuss) नामक गणितज्ञ ने ऐसा पहला model दिया, जिसमे ब्रह्माण्ड के केंद्र मे धरती की बजाय सूर्य को रखा गया। पर उस समय इसे ज्यादा मान्यता नही मिली। फिर 16वी सदी मे इस model को तब स्वीकृति मिली जब Nicolaus Copernicus ने इस idea को फिर से जीवित किया।
17वी सदी आने तक astronomers को यह आभास हो गया था, की सौरमण्डल के केंद्र मे सूर्य है, धरती नही। धरती सहित बाकी सारी celestial bodies सूर्य का चक्कर लगाती है । और moon कोई planet नही है बल्कि धरती का एक satellite जो चाँद के लिए एक और नाम है, यानि की आसमान की वो एकलौती चीज है जो सच मे धरती की परिक्रमा करती है। 
18वी सदी के मध्य के बाद दो और planets की खोज की गई: 1781 मे  Uranus और 1846 मे Neptune. 1801 मे mars और Jupiter के बीच Ceres की खोज की गई, जिसे शुरुआत मे planet माना गया। पर जैसे जैसे इस क्षेत्र मे और चीजों की खोज हुई यह एहसास हुआ की Ceres असल मे उन objects मे से पहला था जिन्हे हम आज asteroid कहते है।  
              1930 मे Pluto की खोज की गई, और इसे ninth planet माना गया। Pluto, Mercury से काफी छोटा है। असल मे यह सौरमण्डल के कई ग्रहों के चांदो से भी छोटा है। और दूसरे planets के विपरीत इसका चाँद Charon इससे लगभग आधे आकार जितना है। और ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे यह Pluto के साथ orbit share करता हों। हालाकी 1980 के दशक तक Pluto का planet का यह ताज बरकरार रहा पर 1990 के दशक मे हुई नई खोजों से सब बदलना शुरू हुआ ।   
              Telescopes मे हुए technical advancements के कारण दूर दराज़ की छोटी चीजों को detect करने की बढ़ी क्षमता के कारण, 90 के दशक तक बहुत दूर से सूर्य का चक्कर लगा रहे कई सारे बर्फीले objects का पता लगा। Neptune की orbit के आगे मौजूद छल्ले के आकार के इस क्षेत्र Kuiper Belt  कहा जाता है। यहा  स्थित objects को Kuiper Belt Objects या KBOs कहते है। Neptune की कक्षा से बाहर मौजूद सभी चीजों को Trans-neptunian objects कहा जया  है। इसलिए KBOs को Trans-neptunian objects भी कह सकते है ।
              2005 मे astronomers ने यह announce किया की उन्होने लगभग Pluto के ही आकार का  एक 10वा  Planet पाया है, जिसका नाम Eris रखा गया। ये Pluto के आकार का एक KBO था। लोगो ने planet के concept पर पुनः विचार करना शुरू किया, और यह सोचना शुरू कर दिया की आखिर एक planet क्या होता है। इस नए object को किस group मे रखा जाए? क्या यह भी ग्रह है या कुछ और? अब इन प्रश्नों के उत्तर अपने आप मे ही सिद्ध नही थे। अलग-अलग लोगो ने इसके प्रति अलग-अलग विचार प्रकट किए। वे आपस मे किसी एक बात पर सहमत नही हों सके।
International Astronomical Union (IAU), जो की astronomers की विश्व व्यापी संस्था है, इस वार्तालाप में शामिल हुई। इन नए space objects को किस group मे रखा जाए इसका ज़िम्मा IAU ने अपने हाथों मे लिया। सन 2006 मे IAU ने एक resolution pass किया जिसमे उसने planet को define किया और objects की एक नई category establish की: dwarf planets या बौना गृह। इस category में Eris, Ceres, Pluto को शामिल किया गया। हाल ही मे खोजे गए दो और नए objects  Haumea और Makemake को भी इसी category मे शामिल किया गया। Kuiper belt मे 100 और dwarf planets हो सकते है। और भी 100 इसके ठीक बाहर। 
              IAU ने satellites को छोड़ कर हमारे सौरमण्डल के सभी objects को define किया है।  इन objects  को तीन categories मे बँटा गया है। Planets, Dwarf-Planets और Small Solar System.Bodies. आइए, इनकी परिभाषा पर ध्यान दें।
1. Planet एक ऐसी celestial body है जो 
a) सूर्य का चक्कर लगाती है। 
b) उसके पास इतना mass है की वो अपने ग्रूत्व के कारण hydro-static equilibrium को पा सके यानि की वो गेंद        के आकार की हो। 
c) उसने अपने orbit के अड़ोस-पड़ोस मे मौजूद चीजों को साफ कर दिया हो ।
2. Dwarf planet एक ऐसी celestial body है जो सूर्य का चक्कर लगाती हो । 
a) उसके पास इतना मास हो की वो hydro-static equilibrium या गेंद के आकार को पा सके । 
b) पर उसने अपने orbit के  आसपास मौजूद चीजों को साफ न किया हो ।
c) और वो satellite न हो यही की सूर्य के अतिरिक्त किसी और चीज की परिक्रमा न कर रहा हो। 
3. इसके अतिरिक्त सौरमण्डल मे मौजूद सभी चीजों को एक साथ “Small Solar System Bodies”  …….बोला जाता है ।  
              सभी astronomers इन definitions के ऊपर एक मत नहीं है । जहा इनमे से कुछ लोगो को ऐसा लगता है की यह classification scheme इस तरीके से design की गई थी ताकि planets की संख्या को सीमित रखा जा सके, वही दूसरों का कहना है की यह definitions incomplete और unclear है, खास कर सौरमण्डल के बनने और विकसित होने की प्रक्रिया को समझने के लिए। 
              एक विचार यह भी है कि planets को साधारणतः ऐसे objects के रूप मे define करना चाहिये जो इतने massive हो की वो लगभग गेंदाकार हो। पर कुछ scientists का यह मानना है कि यह बहुत simple definition इस बात को ध्यान मे नही लेती कि आखिर उस object को कितना ज्यादा गोल होना चाहिये । 
इस परिभाषा के साथ एक समस्या यह भी है कि बहुत दूर स्थित किसी object के आकार का पता लगाना  बहुत कठिन है। कुछ astronomers यह तर्क देते है planet को उसके location और composition के आधार पर  define करना चाहिये ।
Planets को कैसे  define करे ? यह debate अभी भी जारी है। जैसे जैसे हमारी समझ और विस्तृत व गहरी होती जाएगी, यह ब्रह्माण्ड हमे और ज्यादा जटिल नज़र आएगा। researchers ने  कई सौ ऐसे planets खोजे  है, जो हमारे सौरमण्डल से बाहर है, जो सूर्य की बजाय किसी और तारे का चक्कर लगाते  है। इन्हे exoplanets  कहा जाता है। हमारी अपनी galaxy Milky-way मे ही कई सौ अरब planets हो सकते है,  और इनमें से कुछ जीवन के योग्य भी हो सकते है।  क्या planets की हमारी यह नई definition उनके लिए भी पर्याप्त होगी? 
धन्यवाद। 
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